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Zindagi Shayari

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Share kro jisse aap baat krte ho or jisse nhi krte…

“ज़िन्दगी का फलसफा भी कितना अजीब है,
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे है… ”

ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो,
ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है।

अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी…
लोग तसल्लियां तो देते हैं , पर साथ नहीं…!!

जीवन की सुबह में कभी सांझ न हो
जो मिल न सके रब से वो मांग न हो
खूब चमकें सितारे खुशियों के
ज़िन्दगी कभी अमावस का चाँद न हो

Zindagi Shayari

सही वक़्त पर पिए गए “कड़वे घूंट”
अक़्सर ज़िन्दगी “मीठी” कर दिया करते है”

रास्ता तू ही और मंज़िल तू ही, चाहे जितने भी चलूँ मैं कदम,
… … तुझसे ही तो मुस्कुराहटें मेरी, तुझ बिन ज़िन्दगी भी है सूनी..!!

तकदीरें बदल जाती हैं, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो;
वर्ना ज़िन्दगी कट ही जाती है ‘तकदीर’ को इल्ज़ाम देते देते….

ये ज़िन्दगी जो मुझे कर्ज़दार करती रही,
कभी अकेले में मिले तो हिसाब करूँ

धीरे धीरे उम्र कट जाती है, जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है,
कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है..

“दहशत” सी होने लगी है इस सफ़र से अब तो…
ए-ज़िन्दगी_ कहीं तो पहुँचा दे„„„ख़त्म होने से पहले…

चाहा है तुझ को तेरी तग़ाफ़ुल के बावजूद;
ए ज़िन्दगी तू याद करेगी कभी हमें

मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है
ज़िन्दगी की लेकिन सिर्फ सांसें लेने को जीना तो नहीं कहते!


बाद मुद्दत के यह घडी आई आप आये तो ज़िन्दगी आई
इश्क मर-मर के कामयाब हुआ आज एक ज़र्रा आफताब हुआ


कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िन्दगी की मिसाल दी,
मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी !

ज़िन्दगी की राहों में.. ऐसा अक्सर होता है..
फैसला जो मुश्किल हो वो ही बेहतर होता है..!!

डूबती हैं ज़िन्दगी,ग़म के सागर में कभी
बच निकलने की तुम्ही,बस आस लगते हो मुझे

आरज़ू,हसरत,तमन्ना और ख़ुशी कुछ भी नही,
ज़िन्दगी में तू नही तो ज़िन्दगी कुछ भी नही…’

हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर, तुझपर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा,
ना रोते हम यूँ तेरे लिये, अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता…

ज़िन्दगी तुझसे हर एक साँस पे समझौता करूँ,
शौक़ जीने का है मुझको मगर इतना तो नहीं,
रूह को दर्द मिला… दर्द को आँखें न मिली,
तुझको महसूस किया है तुझे देखा तो नहीं।

आहिस्ता चल ऐ ज़िंदगी
कुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं,
कुछ दर्द मिटाने बाकी हैं
कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं।

Zindagi Shayari

ऐ ज़िन्दगी इतने भी दर्द न दे कि मैं बिखर जाऊं,
ऐ ज़िन्दगी इतने भी ग़म न दे कि ख़ुशी भूल जाऊं,
ऐ ज़िन्दगी इतने भी आँसू न दे कि मैं हँसना भूल जाऊं,
इतने भी इम्तिहान न ले कि मैं हार के जीना भूल जाऊं।

वो हर बार अगर चेहरा बदल कर न आया होता,
धोखा मैंने उस शख्स से यूँ न खाया होता,
रहता अगर याद कर मुझे लौट के आती नहीं,
ज़िन्दगी फिर मैंने तुझे यूं न गंवाया होता।

ज़िन्दगी दरस्त-ए-ग़म थी और कुछ नहीं,
ये मेरा ही हौंसला है की दरम्यां से गुज़र गया।

ज़िन्दगी हर हाल में एक मुकाम माँगती है,
किसी का नाम तो किसी से ईमान माँगती है,
बड़ी हिफाजत से रखना पड़ता है दोस्त इसे,
रूठ जाए तो मौत का सामान माँगती हैं।

चूम लो हर मुश्किल को अपना मान कर,
क्योंकि ज़िन्दगी कैसी भी है… है तो अपनी ही।

यह ज़िन्दगी बस सिर्फ पल दो पल है,
जिसमें न तो आज और न ही कल है,
जी लो इस ज़िंदगी का हर पल इस तरह,
जैसे बस यही ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है।

ज़िन्दगी तस्वीर भी है और तक़दीर भी,
फर्क तो सिर्फ रंगों का है।
मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर, और
अनजाने रंगों से बने तो तक़दीर।

आँखों को अश्क का पता न चलता,
दिल को दर्द का एहसास न होता,
कितना हसीन होता जिंदगी का सफ़र,
अगर मिलकर कभी बिछड़ना न होता।

दर्द कैसा भी हो कभी आँख नम ना करो,
रात काली सही लेकिन ग़म ना करो,
एक सितारा बन जगमगाते रहो,
ज़िन्दगी में यूँ ही सदा मुस्कुराते रहो।

करने लगे हिसाब -ऐ- जिन्दगी तो रो बैठे,
गिनते रहे सालों को और लम्हों को खो बैठे।

जिंदगी के राज़ को राज़ रहने दो,
अगर है कोई ऐतराज़ तो रहने दो,
पर जब दिल करे हमें याद करने को,
तो उसे ये मत कहना के आज रहने दो।

ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़,
मुझको आदत है मुस्कुराने की।

ज़रा मुस्कुराना भी सीखा दे ऐ ज़िंदगी,
रोना तो पैदा होते ही सीख लिया था।

ऐ ज़िंदगी काश तू ही रूठ जाती मुझ से,
ये रूठे हुए लोग मुझ से मनाये नहीं जाते।

ज़िन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते ले कर आती है,
ज़िन्दगी की हर शाम कुछ तजुर्बे दे कर जाती है।

ऐ जिन्दगी तुझ पर मेरा जोर क्यों नहीं चलता,
क्यों हर चीज पराई दी है तूने मुझे।

है अजीब शहर की ज़िन्दगी
न सफ़र रहा न कयाम है,
कहीं कारोबार सी दोपहर
कहीं बाद मिजाज सी शाम है।

आहिस्ता चल ऐ ज़िन्दगी
कुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं,
कुछ के दर्द मिटाने बाकी हैं
कुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं।

परेशान हूँ मैं और दर्द का है नाम ज़िन्दगी,
अच्छा या बुरा मैं हूँ पर बदनाम ज़िन्दगी,
स्याह रातें, मायूस, आँसू, लाचारी, तन्हाई,
मोहब्बत दे या कर मौत का इंतजाम ज़िन्दगी।

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