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Zakhmi Dil Shayari

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Share kro jisse aap baat krte ho or jisse nhi krte…

नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर
जरा टूटे दुए दिल के टुकड़े उठा लेने दो

जब कोई ख्वाब अधुरा रह जाते हैं !
तब दिल के दर्द आंसु बनकर बाहर आते हैं

कितना नादान है ये दिल कैसे समझाऊ
तू जिसे खोना नहीं चाहता हो तेरा होना नहीं चाहता

ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो
दर्द की तुम शिद्दत,
दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या और ज्यादा क्या।

Zakhmi Dil Shayari

एक ही जख्म नहीं सारा वजूद ही जख्मी है !
दर्द खुद भी हैरान है के उठूं तो कहां से उठूं

टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता !
इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता !
ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता !
के टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता !!

ये गलत है कहना की महोब्बत ने हमारा दिल तोड़ा है !
हम खुद ही टुट गए किसी से महोब्बत करते-करते !!

एक दिन जब हुआ ‎इश्क‬ का एहसास उन्हें !
वो हमारे पास आकर सारा ‪‎दिन‬ रोते रहे !
और ‪‎हम‬ भी इतने खुदगरज निकले ‪‎यारों !
कि ‪आँखें‬ बद करके ‪कफन‬ मे सोते रहे !!

ना हम रहे दिल लगाने के क़ाबिल !
ना दिल रहा गम उठाने के क़ाबिल !
लगा उसकी यादों से जो ज़ख़्म दिल पर !
ना छोड़ा उस ने मुस्कुराने के क़ाबिल !!

दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना !
अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना !
कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं !
फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना !!

ना मुस्कुराने को जी चाहता है !
ना आंसू बहाने को जी चाहता है !
लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में !
बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है !!

मयखाने में जाम टूट जाता है
इश्क़ में दिल टूट जाता है
न जाने क्या रिश्ता है दोनों में
जाम टूटे तो इश्क़ याद आता है
दिल टूटे तो जाम याद आता है

ख़ाक उड़ती है रात भर मुझ मैं
कौन फिरता है दर-ब-दर मुझ मैं
मुझ को मुझ मैं जगह नहीं मिलती
कोई मौजूद है इस क़दर मुझ मैं …

Zakhmi Dil Shayari

फ़िज़ा में बिखरी ज़र्द आंसुओं की तहरीरें
दाग़ -ऐ -गुल में दरख्तों के दाग़ मिलते हैं
गलत गुमान न कर मेरी इन खुश्क आँखों पे
समंदर में जज़ीरे ज़रूर मिलते हैं

ओ दिल तोड़ने वाले इतना तो बताता जा,
की ये सजा प्यार करने की है या मेरी वफाओं की

हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर…
अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो

जब कोई ख्वाब अधुरा रह जाते हैं !
तब दिल के दर्द आंसु बनकर बाहर आते हैं

तुम्हारा नाम लेने से मुझे सब जान जाते हैं…
मैं वो खोई हुई इक चीज हूँ जिसका पता तुम हो

तुम्हारे खुश होने के अंदाज से लगता है….
कुछ टुटा है बड़ी खामोशी से तेरे अन्दर

हमें तो प्यार के दो लफ्ज ही नसीब नहीं,
और बदनाम ऐसे जैसे इश्क के बादशाह थे हम

वो मंजर ही मौहब्बत में बड़ा दिलकश गुजरा,
किसी ने हाल ही पूछा था और आँखें भर आई

दुखती रग पर ऊँगली रखकर पूछ रही हो कैसे हों …
तुमसे ये उम्मीद नहीं थी दुनिया चाहे जैसी हों

दिल के दर्द तुम्हें कैसे बताऊ
दिल नुमाइश की चीज नहीं है, जो किसी को भी अपना दिल दिखाऊं…

अंजान अगर हो तो गुज़र क्यूँ नहीं जाते…
पहचान रहे हो तो ठहर क्यूँ नही जाते

हालात की दलील देकर उन्होनें साथ छोङ़ा , तो हम आहत नहीं हुए ….,
सोचा हमसे ना सही , चलो किसी से तो वफ़ा निभाई उन्होने

ख्वाबों में हीं मुझसे मिलने आ जाओ तुम
तेरी बहुत शिकायतें करनी है, मुझे तुमसे…

तेरे बाद मुझे किसी से प्यार न मिला
तेरे बाद मेरे प्यार का, कोई हकदार न मिला…

अपनी कमजोरी को, किस खूबसूरती से ढक लेते हैं लोग
कुछ बुरा हो जाए, तो खुदा को दोष देते हैं लोग…

नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर
जरा टूटे दुए दिल के टुकड़े उठा लेने दो

उसके प्यार में हमने जमाना भुला दिया
और उसने भरी महफिल में, हमारा तमाशा बना दिया……

    ये किस मोड़ पर, तुम्हे बिछड़ने की सूझी,
मुद्दतों बाद तो संवरने लगे थे….हम

हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ ;
हर याद पे दिल का दर्द ताज़ा हुआ

तेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नही पड़ता ऐ दिल,,,,.
जिनके चाहने वाले ज्यादा हो वो अक्सर बेदर्द हुआ करते हैं

नमक तुम हाथ में लेकर, सितमगर सोचते क्या हो,,
हजारों जख्म है दिल पर, जहाँ चाहो छिड़क डालो

मुझे भी ज़िन्दगी में तुम ज़रूरी मत समझ लेना,
सुना है तुम ज़रूरी काम अक्सर भूल जाते हो

ये मोहब्बत है या नफरत कोई इतना तो समझाए,
कभी मैं दिल से लड़ता हूँ कभी दिल मुझ से लड़ता है

हमें भुलाकर सोना तो तेरी आदत ही बन गई है, अय सनम;
किसी दिन हम सो गए तो तुझे नींद से नफ़रत हो जायेगी

जाने क्यूँ बरसने से, मुकर जाता है हर बार,
मेरे हिस्से में आया है, जो टुकड़ा बादल का


दर्द-ए-दिल कैसे बयाँ करूं तुझसे
तू भी अजनबियों से घिरी है, मैं भी बेगानों के साथ हूँ

हमसे मत पूछिए जिंदगी के बारे में
अजनबी क्या जाने अजनबी के बारे में

होठों ने सब बातें छुपा कर रखीं ……
आँखों को ये हुनर… कभी आया ही नहीं

तूने प्यार सौदा समझ के ही किया होता तो अच्छा होता.
मुनाफे के लिए ही सही तेरा प्यार थोडा तो सच्चा होता

हमें कोई ग़म नहीं था, ग़म-ए-आशि़की से पहले,
न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से पहले

ज़िंदगी चैन से गुज़र जाए…
गर तू ज़हन से उतर जाए

हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह…
वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे

न जाने क्यों प्यार में, किसी को खुदा बनाते हैं लोग
अब तो वक्त बदलते हीं, गिरगिट की तरह बदल जाते हैं लोग

ये क्या सितम है‍,क्यूं रात भर सिसकता है
वो कौन है जो “दियों” में जला रहा है मुझे

नजर अंदाज करने कि कुछ तो वजह बताई होती,
अब में कहाँ कहाँ खुद में बुराई ढूँढू

हमे पता था की उसकी मोहब्बत में ज़हर हैं ;
पर उसके पिलाने का अंदाज ही इतना प्यारा था की हम ठुकरा ना सके

हाथ ज़ख़्मी हुए तो कुछ अपनी ही खता थी…..
लकीरों को मिटाना चाहा किसी को पाने की खातिर

जिस दिन खुद से दोस्ती हो जायेगी,
इस कमबख्त अकेलेपन से निजात मिल जायेगी

है तमन्ना फिर, मुझे वो प्यार पाने की…….
दिल है पाक मेरा , ना कोशिश कर आज़माने की

कितना नादान है ये दिल कैसे समझाऊ
तू जिसे खोना नहीं चाहता हो तेरा होना नहीं चाहता

हमें ए दिल कहीं ले चल … बड़ा तेरा करम होगा
हमारे दम से है हर गम …न होंगे हम और ना गम होगा

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