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Sad Status

Sad Status! Hello friends, I got some new Collection of Sad Status. Sad status update has been published. So check it and share it with your other friends.

सपना है आँखों में मगर नींद नहीं है,
दिल तो है जिस्म में मगर धड़कन नहीं है,
कैसे बयाँ करें हम अपना हाल-ए-दिल,
जी तो रहें हैं मगर ये ज़िंदगी नहीं है।

दिए हैं ज़ख़्म तो मरहम का तकल्लुफ न करो,
थोड़ा सा तो रहने दो, मुझ पर एहसान अपना।

खफा रहने का शौक भी पूरा कर लो तुम,
लगता है तुम्हे हम #ज़िंदा अच्छे नहीं लगते।

बड़ा गजब किरदार है मोहब्बत का,
अधूरी हो सकती है मगर खत्म नहीं।

ग़म हूँ, दर्द हूँ, साज़ हूँ, या आवाज़ हूँ,
बस जो भी हूँ तुम बिन बहुत उदास हूँ।

इन्सान अपनी मर्जी से खामोश नहीं होता,
किसी ने बहुत सताया हुआ होता है।

सिगरेट जलाई थी तेरी याद भुलाने को,
मगर कम्बख्त धुंए ने तेरी तस्वीर बना डाली…!

जिंदगी हे सफर का सील सिला,
कोइ मिल गया कोइ बिछड़ गया,
जिन्हे माँगा था दिन रत दुआ ओमे,
वो बिना मांगे किसी और को मिल गया.

हाथ क्या जुल्फ़ो मे भी रंगो को समेट कर रखती थी वो..
गिरगट से भी ज्यादा रंग बदलने वाली..

वो मुझे जल्द ही भुल जाएगा
मै दुशमन थोडा हुँ जो उसे याद रहुँगा..

शहर ग़ैर हो #चुका है..तुम ग़ैर हुए तो #क्या हुए…!

हम दोनों “धोखा” खा गए….
मैंने तुम्हें औरो से “अलग” समझा
और..तुमने मुझे औरो “जैसा” समझा….

कुछ लोग आये थे
मेरा गम बटाने
मुझे खुश देखा,
तो नाराज होकर चल दिये

लब” तो खामोश रहेंगे..ये “वादा” है मेरा..”तुमसे”….*
*अगर “कह” बैठी..कुछ “निगाहें”..तो “खफा” मत होना…

सज़ा यह मिली की आँखों से नींद छीन ली उन्होंने
जुर्म ये था कि उसके साथ रहने का ख्वाब देखा था…

मुझको छोड़ने की बजह तो बता जाते, तुम मुझसे बेज़ार थे या हम जैसे हज़ार थे।

कौन कहता है नेचर और सिग्नेचर कभी नही बदलतें हैं, अगर हाथ पर चोट लगे तो सिग्नेचर बदल जाता है, और चोट अगर दिल पर हो तो नेचर बदल जाता है।

एक बात हमेशा याद रखना दुनिया में तुम्हे मेरे जैसे बहुत मिलेंगे, लेकिन उनमे तुम्हे हम नही मिलेंगे।

ये एक तरफा प्यार भी बहुत अज़ीब होता है, हमेशा डर लगा रहता है की कोई उन्हें हम से चुरा न ले।

जब रिश्ता नया होता है तो लोग बात करने के बहाने ढूंढते हैं, लेकिन जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है न तो लोग दूर जाने के बहाने ढूंढते हैं।

औरत अगर रिश्ता निभाना चाहे तो झोपड़ी में भी खुश रहती है, लेकिन औरत रिश्ता न निभाना चाहे तो महलों को भी ठुकरा देती है।

इतना दर्द तो मौत भी नही देती, जितनी दर्द तेरी ख़ामोशी दे रही है।

हंसकर कबूल क्या करली सजाएं हमने, हम पर इल्जाम लगाने का दस्तूर बना दिया इस जमाने ने।

तेरे बाद हमारा हम दर्द कौन बनेगा, हमने तो सब छोड़ दिया तुझे पाने की जिद्द में।

हकीकत कुछ और ही होती है,
हर गुमसुम इंसान पागल नही होता।

टूट कर बिखर जाते हैं वो लोग मिटटी की दीवारों की तरह,
जो खुद से भी ज्यादा किसी और से प्यार करते हैं।

हम तो बेवजह ही करते रहे रौशनी की तलाश,
रात दिये के सहारे कट सकती थी मालूम ना था।

मिल जायेगा हमें भी कोई टूट के चाहने वाला,
अब शहर का शहर तो बेवफा नहीं हो सकता।

हमने सोचा था की बताएँगे सब दुःख दर्द तुमको,
पर तुमने तो इतना भी ना पूछा की खामोश क्यूँ हो।

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