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Dhoka Shayari

Dhoka Shayari! Hi friends, I have collected some new Dhoka Shayari. Dhoka Shayari has been published. So check the latest Dhoka Shayari and share it with your lovely friends. Read it and enjoy it.so you can hare it with your all lovely friends. Its give smile and happiness to everyone face. Laughter is the way to make smile on everyone’ s face. Laughter is the best medicine for our health. Be happy and keep laughing…
Share kro jisse aap baat krte ho or jisse nhi krte…

हम दोनों ही धोखा खा गए हमने तुम्हें औरों से अलग समझा और तुमने हमें औरों जैसा ही समझा…

पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पे दुनिया छोड़ जाते हम
समुन्द्र के बीच में पहुच कर फरेब किया उसने
वो कहता तो किनारे पर ही डूब जाते हम

Dhoka Shayari

उसकी हर एक शिकायत देती है मुहब्बत की गवाही,
अजनबी से वर्ना कौन हर बात पर तकरार करता है.

वो बात क्या करें जिसकी कोई खबर ना हो।
वो दुआ क्या करें जिसका कोई असर ना हो।
कैसे कह दे कि लग जाय हमारी उमर आपको।
क्या पता अगले पल हमारी उमर ना हो।

इन्सान कम थे क्या.. जो अब मोसम भी धोखा देने लगे…

दिल धोखे में है , और धोखेबाज दिल में …!!

Saans bhi loon to uski mehak aati hai….
usne thukraya hai mujhe itne qareeb aane k baad..

Hum toh bane hii tabah hone k liye the,,
tumhara milna toh bas ek bahana tha…!!”

हैरान हूँ तुम्हारे “हसरतों” पर “मैं”,,,,, !!
हर चीज माँगी तुमने “मुझसे” …”मुझे” छोड़कर …!!

खाए है लाखो धोखे, एक धोखा और से लेंगे. तू लेजा अपनी डोली को, हम अपनी अर्थी को बारात कह लेंगे..

Yoon to koi bhi tanha nahi hota,
Chaah kar kisi se koi juda nai hota,
Mohabbat ko majbooriya hi le dubati hai,
Warna koi khushi se bewafa nahi hota.

तेरी दोस्ती ने दिया शकुन इतना की तेरे
बाद कोई अच्छा भी न लगे
तुझे करनी है बेवफाई तो इस क़दर करना
की तेरे तेरे बाद कोई बेवफा भी न लगे

दिल किसी से तब ही लगाना जब दिल्लों को परखना सिख लो
हट एक चहरे की फितरत में वफादारी नहीं होती

कैसे बयां करो अलफ़ाज़ नहीं है
दर्द का तुझे मेरे अहेसास नहीं है
पूछते हु मुझसे किया दर्द है
मुझे दर्द ये है के की तो मेरे पास नहीं है

अभी सूरज नहीं दोबा ज़रा शाम होने दो
में खुद लौट जओंग्गा मुझे नाकाम तो होने दो
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है ज़माना
में खुद हूँ जाऊंगा बदनाम पहेले मेरा नाम तो हुने दो

हर मुलाक़ात पर वक़्त का ताखाज़ा हुवा
हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुवा
सोनी थी सिर्फ लोगो से जुदाई की बातें
आज खुद पर बीती तो हकीक़त का अन्ज़दा हुवा

Dhoka Shayari

दिल का हाल बताना नहीं आता किसी को ऐसे तडपना नहीं आता
सुनना चाहते है एक बार आवाज आपकी
मगर बार करने का बहाना नहीं आता

महेसूस कर रहे है तेरी लापरवाहियां कुछ दिनों दे
अगर हम बदल गए तो मानना तेरे बस की बात नहीं

इन आँखों में आसूं आये न होते अगर वो पीछे से मुश्कुराये न होते
उनके जाने के बाद बस यही गम रहेगा
कि काश वो हमारी ज़िन्दगी में आये न होते

जो मेरा था वो मेरा हो न पाया आँखों में आसों भरे थे पर में रो न पाया
एक दिन उन्होंने कहा कि हम मिलेंगे खुवाब में
पर मेरी बदकिस्मती तो देखिये उस रात में सो नहीं पाया

साथ रहना था ही नहीं तो
तुमने हमसे नाता क्यों जोड़ा.
हमे धोका देकर तुमने
हमे कही का नहीं छोड़ा.

धोका खा कर भी हम जिन्दा है.
तेरे दर्द के साथ भी हम जिन्दा है.

धोका तूने ऐसा दिया.
मेरी जिंदगी का हर मकसद
मुझसे छीन लिया.

दिल के दर्द को दिखाना बड़ा मुश्किल है.
धोका खा कर बताना बड़ा मुश्किल है.

न तुमको कोई ऐसा मौका देते की तुम धोका देते.
अच्छा होता बेडियो से बाँध कर
अपने गिरफ्त में रखते.

मुझे धोका दे कर आज तू बहुत खुश है.
ऐसा कर के तू आज बहुत खुश है.
तेरी ख़ुशी तो हमसे थी ना.
मुझे आज तू इतना रुला कर भी खुश है.

सुनी सुनाई बात पर भरोसा ना था.
धोका खाने पर सारी बाते समझ आ गयी.

मेरे प्यार को ठुकरा कर तूने अच्छा किया.
मेरी चाहत को भुला कर तूने अच्छा किया.

धोका मिली मुझे तो मै जीना सिख गया.
आज अपनी आँखे खोल कर
मै चलना सिख गया.

अपनी सफाई के चर्चे तो जमाना खूब देता है.
क्योकि वो वफादार है.
हम तो कुछ ना कह कर भी आज.
के लिये ऐक धोकेबाज इन्सान है.

ना सोचा था कभी ऐसा होगा की.
रस्ते के हर मोड़ में हमें
धोका का रास्ता मिलेगा.

साथ तो मैंने तब दिया जब तुझे जरुरत थी.
तूने तो मुझे धोका ऐसा दिया की मेरी कुछ ना बची.

धोका दे कर तुमने अच्छा नहीं किया.
क्यों ऐसा सितम तुमने मेरे साथ किया.

तुझसे प्यार बहुत ज्यादा था.
तेरी हर बात का मुझे अंदाजा था.
तूने मुझे अचानक कुछ ऐसा दर्द दे दिया.
धोका का तोहफा मेरे दिल को दे दिया.

हम तेरी चाहत में धोका खा गए.
तुझे जिंदगी बनाने के चक्कर में.
सब कुछ तबाह कर गए.

कुछ लोग हमारी जिंदगी बन जाते है.
प्यार की निशानी बन जाती है.
अचानक ही फिर हमारी
धोके की वजह ही बन जाती है.

प्यार हमने कुछ यूँ किया था.
हर तकलीफ में तेरा साथ दिया था.
तूने वो सारी बाते भूल डाली.
प्यार करने वाले इन्सान को ही
धोका दे डाली.

प्यार तो तुझसे ही हुआ था बेपनाह.
तूने तोड़ कैसे दिया.
मेरे प्यार के ख़त को.
कागज का टुकड़ा समझ कर
फेक कैसे दिया.

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