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Attitude Shayari

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#Attitude😏 के 👉#बाजार 🌆में जीने 🚶🏻का अलग 😎ही #मजा😉 है लोग👉👦#जलना 😡नहीं❌ #छोड़ते 😠 और➡ #हम_मुस्कुराना 😄

अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उँगलियाँ,
जिनकी हमे छुने की औकात नहीं होती।

दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी,
मैं हाथ नहीं उठाता बस नज़रों से गिरा देता हूँ।

Attitude Shayari

जहाँ कदर न हो अपनी वहाँ जाना फ़िज़ूल है,
चाहे किसी का घर हो चाहे किसी का दिल।

मत करो मेरी पीठ के पीछे बात जाकर कोने में।
वरना पूरी जिंदिगी गुज़र जाएगी रोने में।

वो खुद पे इतना गुरूर करते हैं,
तो इसमें हैरत की बात नहीं,
जिन्हें हम चाहते हैं,
वो आम हो ही नहीं सकते।

सुन पगली…
तू मोहब्बत है मेरी इसलिए दूर है मुझसे,
अगर जिद होती तो मेरी बाहों में होती।

तेरी ईगो तो 2 दिन की कहानी है
बट मेरी अक्कड़ तो खानदानी है

सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी,
हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।

बोलाथानाकी #एंट्रीभलेहीलेटहोगी #लेकिन सबसे ग्रेटहोगी. जिंन्दगी जीतेहे_
हम शानसे. तभीतोदुश्मनजलतेहेहमारेनाम_से.

एक इसी उसूल पर गुजारी है जिंदगी मैंने,
जिसको अपना माना उसे कभी परखा नहीं।

फ़क़ीर मिज़ाज़ हूँ, मै अपना अंदाज़
औरों से जुदा रखती हूँ,
लोग मस्जिदो मे जाते है,
मै अपने दिल मे ख़ुदा रखती हूँ।

मेरे साथ जब मैं खुद खड़ा होता हूँ,
तब मैं क़यामत के हर तूफ़ान से बड़ा होता हूँ।

वो Attitude ही क्या
जो वक्त के साथ टूट कर बिखर जाये,
अगर कोई किसी से दिल लगाये,
तो ऐसे लगाये जैसे तेज़ आंधी
सूखे पत्तो को न उड़ा पाए।

वही हमरे काबिल न था दोस्तों, वरना,
मोहब्बत की क्या औकात जो हमे ठुकरा दे।

छेड़े इस शेर को, है किसीकी इतनी औकात,
गर्दिश में घेर लेते हैं गीदड़ भी शेर को।

मेरा वाला थोड़ा लेट आयेगा, लेकिन जब आयेगा तो लाखो में एक आयेगा।

किरदार में मेरी भले ही अदाकारियां नही है, खुद्दारी है, Attitude है, पर मक्कारियां नही है।

इतना Attitude न दिखा जिंदगी में तकदीर बदलती रहती है, शीशा वहीं रहता है, पर तस्वीर बदलती रहती है।

Attitude Shayari

हक़ से दो तो तुम्हारी नफरत भी कबूल हमें,
खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें।

सूरज ढला तो कद से ऊँचे हो गए साये,
कभी पैरों से रौंदी थी यहीं परछाइयां हमने।

की मोहब्बत तो सियासत का चलन छोड़ दिया,
हम अगर प्यार न करते तो हुकूमत करते।

हम भी बरगद के दरख़्तों की तरह हैं,
जहाँ दिल लग जाए वहाँ ताउम्र खड़े रहते हैं।

मिज़ाज में थोड़ी सख्ती लाज़िमी है हुज़ूर,
लोग पी जाते समंदर अगर खारा न होता।

मेरी सादगी ही गुमनाम में रखती है मुझे,
जरा सा बिगड़ जाऊं तो मशहूर हो जाऊं।

सहारे ढूढ़ने की आदत नहीं हमारी,
हम अकेले पूरी महफ़िल के बराबर हैं।

थोड़ी खुद्दारी भी लाजिमी थी दोस्तो,
उसने हाथ छुड़ाया तो हमने छोड़ दिया।

अजीब सी आदत और गज़ब की फितरत है मेरी,
मोहब्बत हो कि नफरत हो बहुत शिद्दत से करता हूँ।

दिल है कदमों पे किसी के सर झुका हो या न हो,
बंदगी तो अपनी फ़ितरत है ख़ुदा हो या न हो।

मैं लोगों से मुलाकातों के लम्हें याद रखता हूँ,
बातें भूल भी जाऊं पर लहजे याद रखता हूँ।

न मैं गिरा और न मेरी उम्मीदों के मीनार गिरे,
पर कुछ लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे।

एहसान ये रहा तोहमत लगाने वालों का मुझ पर,
उठती उँगलियों ने मुझे मशहूर कर दिया।

छोड़ दी है अब हमने वो फनकारी वरना,
तुझ जैसे हसीन तो हम कलम से बना देते थे।

गुमां इतना नहीं अच्छा तू सुन ले पहले जाने के,
पलटने पर मुकर सकता हूँ तुझको जानने से भी।

मेरे लफ्जों से न कर मेरे किरदार का फ़ैसला,
तेरा वजूद मिट जायेगा मेरी हकीकत ढूंढ़ते ढूंढ़ते।

समंदर बहा देने का जिगर तो रखते हैं लेकिन​,
​हमें आशिक़ी की नुमाइश की आदत नहीं है दोस्त​।

​मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदल के देख​,
​मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकल के देख​।

लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ,
सर झुकाना नहीं आता तो झुकाए कैसे।

हमको मिटा सके यह ज़माने में दम नहीं,
हमसे ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं।

अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो,
मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो,
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते क्यों हो,
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो।

ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम,
तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हैं हम।

हम जा रहे हैं वहां जहाँ दिल की हो क़दर,
बैठे रहो तुम अपनी अदायें लिये हुए।

चलो आज फिर थोडा मुस्कुराया जाये,
बिना माचिस के कुछ लोगो को जलाया जाये।

जिसे निभा न सकूँ ऐसा वादा नहीं करता,
दावा कोई औकात से ज्यादा नहीं करता।

ज़मीं पर रह कर आसमां
छूने की फितरत है मेरी,
पर गिरा कर किसी को,
ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे।

भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,
तो भूलके तुमको संभलना हमें भी आता है,
मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,
तेरी तरह बदल जाना हमें भी आता है।

बेवक़्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूँ,
आधे दुश्मनो को तो यूँ ही हरा देता हूँ।

चमक सूरज की नहीं मेरे किरदार की है,
खबर ये आसमाँ के अखबार की है,
मैं चलूँ… तो मेरे संग कारवाँ चले,
बात गुरूर की नहीं, ऐतबार की है।

कोशिश यही रहती है कि
हमसे कभी कोई रूठे ना,
मगर नजर अंदाज करने वालो को
पलट कर हम भी नही देखते।

अपनी शख्शियत की क्या मिसाल दूँ यारों
ना जाने कितने मशहूर हो गये
मुझे बदनाम करते करते।

इतना भी गुमान न कर
अपनी जीत पर ऐ बेखबर,
शहर में तेरे जीत से ज्यादा
चर्चे तो मेरी हार के हैं।

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